लफ्झो कि जुगलबंदी २ 

http://en.gravatar.com/naveshwar905 चाह कर भी मुश्किले कम ना होगी ये दिल की दुनिया है आजमाइश कदम कदम पर है... - नागेश्वर सिंग मुश्किले तो आती जाती रेहती है जी, लढ लेते मुश्कलात से एक साथे मिलकर… पर खुदा करे, पेहले उस लायक साथी तो हो! - सुवर्णा (मेघा) कुछ कदम कुछ हौसलो की बात है कुछ …

Continue reading लफ्झो कि जुगलबंदी २ 

लफ्झो कि जुगलबंदी १ 

https://priyasingh91.wordpress.com/ क्या आसान है यूँ ही वास्ता ख़त्म कर देना? दिल क्या जीने देगा? बेबस ना कर देगा? -Lost soul बेबस तो ये खौकला रिश्ता कर देगा, वास्ता खत्म करने पर कौनसा मसला होगा? इस रिश्ते बिन पेहले भी तो जी हि रहे थे, उसके होने से जो दर्द उससे अच्छा उसक ना होना होगा!!! …

Continue reading लफ्झो कि जुगलबंदी १