लफ्झो कि जुगलबंदी १ 

https://priyasingh91.wordpress.com/ क्या आसान है यूँ ही वास्ता ख़त्म कर देना? दिल क्या जीने देगा? बेबस ना कर देगा? -Lost soul बेबस तो ये खौकला रिश्ता कर देगा, वास्ता खत्म करने पर कौनसा मसला होगा? इस रिश्ते बिन पेहले भी तो जी हि रहे थे, उसके होने से जो दर्द उससे अच्छा उसक ना होना होगा!!! …

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बस युहि – २ 

इतने करीब होकर भी जो दूरिया थी हम दोनो मे,  वो अक्सर खलती थी मेरे मन  मे... लगता कुछ मीलो का फासला है,  कुछ कदमो का रास्ता है,  पर फिर भी दूर है हम एक दूसरे से... सोचा अब इतने पास होकर भी.. नजदिकिया कम करने से रहे तुम,  तो इस खलीश को दूर करने …

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​कभी कभी अपने हि दिल दुखाते है!

कभी कभी अपने हि दिल दुखाते है! कभी कभी अपने हि दिल दुखाते है,  फिर खुद हि बुरा मानकर दूरिया बना लेते है!  कभी कभी अपने हि दिल दुखाते है... उस चुप्पी के पीछे एक दरिया है दुखो का, उस दरिया को लांघने कि कोशिश तक नही करते है!  कभी कभी अपने हि दिल दुखाते …

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