सपनो के भवर में..

सपनो के भवर में,
कुछ ऐसे हम खो जाते है..
अपने भी तो तब हम से,
कुछ दूर जरा हो जाते है..

होता है वक्त वो कुछ ऐसा,
जब परछाई तक छोडे साथ..
बस थोडी देर सबर कर लो,
अब थोडा और जरा लढ लो..
बस खुद पर रख थोडा विश्वास,
और मन मे जगा बस जीत की आस..

बस चलते जा सफर पर तू,
उस दिशा को तू पकडे रखना..
थकान हो तो थोडा रुकना,
पर बिलकूल पीछे ना मूडना..

शुरवात मे तू कुछ तडपेगा,
जब सफर मे तू कुछ खोयेगा..
पर जो है तेरा वो होगा वही,
वो कैसे कोई छिनेगा..
होगा अब अमावस कि रात का अंत,
जब अगले दिन सुरज चमकेगा..

फिर से हिम्मत रंग लायेगी,
मंजिल पैरो तले आजायेगी,
जन्नत सा मजा दिखायेगी,
होगी जीत तुम्हारे जजबे की..
होगी जीत तुम्हारे सपनो कि..

एक ऐसा वक्त भी आयेगा,
जो चले गये थे ठुकराकर
वो भी तुझको अब चाहेंगे..

एक ऐसा वक्त भी आयेगा,
जिन लोगो ने किया था खुदसे दूर
वो तुझको अब पास बुलायेगे..

– सुवर्णा बर्गे (मेघा).

Advertisements

14 thoughts on “सपनो के भवर में..

  1. Hey,

    I’m working on my debut poetry book and preparing a mailing list. Would you like me to add your e-mail address please? If so, can you share it with me?

    I don’t plan to do hard-core promotion, I will be e-mailing you privately not through any software.

    I will just inform you when it’s available and when there is some huge fluctuation in price (sale etc.), as on WordPress reader, posts get lost in stampede.

    I won’t be mailing you more than 4 to 5 times a year, and that’s max. Promise!

    And if you want it to share it privately you can do that through contact form on my blog.

    Thank you 🙂

    Like

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s