रावण बनना भी कहां आसान…

रावण में अहंकार था तो, पश्चाताप भी था…

रावण में वासना थी, तो संयम भी था…

रावण में सीता के अपहरण की ताकत थी,

तो बिना सहमति परस्त्री को स्पर्श भी न करने का संकल्प भी था…

सीता जीवित मिली ये राम की ही ताकत थी…

पर पवित्र मिली ये रावण की भी मर्यादा थी…

राम, तुम्हारे युग का रावण अच्छा था…

दस के दस चेहरे, सब “बाहर” रखता था…!!

महसूस किया है कभी उस जलते हुए रावण का दुःख 

जो सामने खड़ी भीड़ से बारबार पूछ रहा था…..

*”तुम में से कोई राम है क्या”*

P.S. I read this on social media, loved it and felt like sharing with you all, must read. Thank you.

– Suvarna (Megha). 

17 thoughts on “रावण बनना भी कहां आसान…

  1. पूर्णतः सहमत है जी आपसे
    परन्तु अंहकार था
    जो प्रकृति के विरूद्ध था
    अत्याचार था
    जो निर्दोषो के विरूद्ध था
    हां व्याभिचार नही था
    लंकेश

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