दुआ…❤

पेहला प्यार तु है मेरा…

तु ही आखरी सनम…!

दुआ करु उस रब से मै…

अब तु ही मिलेे हर जनम…!❤

– सुवर्णा (मेघा)

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18 thoughts on “दुआ…❤

  1. वाह—लाजवाब लिखा आपने।

    भूल बैठी हूँ जहां को,
    मैं तुम्हारे प्यार में,
    भूल बैठी खुद को सनम,
    मैं तुम्हारे प्यार में,
    रक्त के हर कण में मेरे,
    बस गए हो तुम सनम,
    मैं करूँ रब से दुआ,
    तु ही मिलेे मुझे हर जनम…!
    अब ना कोई चाह मेरी,
    फिर भी करूँ साधना,
    मिल गयी जन्नत हमें,
    रब की करूँ आराधना,
    तन का तूँ सृंगार मेरे,
    मन का स्वामी तूँ सनम,
    मैं करूँ रब से दुआ,
    तु ही मिलेे मुझे हर जनम…!

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    1. धन्यवाद सर!

      आपने जो लिखा है उसके सामने तो कणमात्र लिख पायी हु मैं! बहुत लाजवाब लिखा है आपने! 🙂

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      1. उस कण ने ही इस कण को जन्म दिया।ये उसी का अंग है।आप चाहें तो उसमें इसे जोड़ सकते हैं।सुक्रिया—आपने बहुत अच्छी लाईन लिखी है।

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      2. इस बात का आनंद हैं कि मैने लिखी चार पंक्तीया पढ आपको एक पुर्ण कविता लिख दी! शुक्रिया! बहुत प्रेरणा मिलती है आपसे सर! 🙂

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